Tuesday, April 9, 2013

क्या कहें ...

दिल ने कहाँ कहाँ किया बदनाम क्या कहें,
फिर भी न मिला प्यार का पैगाम क्या कहें,
मैंने भी कई ख्वाब हकीकत समझ लिए ,
आखिर न आया कोई मेरे काम क्या कहें ,
न चाहते हुये भी किस बला में फंस गया ,
हँसते है लोग देख के अंजाम क्या कहें ,
दिल की दिमाग की या मुकद्दर की है खता,
इस कश्मकश में गुजरी है हर शाम क्या कहें,
तू तो नहीं मिला तेरा एहसास ही मिला ,
खुद को लुटा दिया है सरेआम क्या कहें,
बर्बाद करके उसने मुझको ही दम लिया,
उसको न मिला और कोई काम क्या कहें ,
ला करके मुझको छोड़ दिया इस मुकाम पर,
चलना मुहाल हो गया दो गाम क्या कहें,
ये किस गुनाह की है सज़ा उम्र भर मिली,
साकी को ढुढ़ते है लिए जाम क्या कहें,
आंखो के भी अश्क अब अपने नहीं रहे,
वह भी किसी के हांथ है नीलाम क्या कहें,
दिल टूटने पर 'अर्जुन' रोना न कभी तुम,
इस शहर में ये हादसे है आम क्या कहें ?  

                

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